आखिर शिवपाल सिंह को बनाना ही पड़ा नई पार्टी

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मुलायम सिंह यादव के परिवार में बिखराव पहले से ही था, अब उनकी समाजवादी पार्टी में भी बिखराव शुरू हो गया. उनके छोटे भाई शिवपाल सिंह यादव ने सपा से नाता तोड़कर बुधवार को समाजवादी सेक्यूलर मोर्चा बनाने की घोषणा कर दी.उनका कहना था कि वे पिछले डेढ़ साल से इंतजार कर रहे थे कि मौजूदा पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव उन्हें उनके क़द के मुताबिक कोई ज़िम्मेदारी सौंपेंगे. लेकिन जब अखिलेश ने अपने चाचा की सुध लेने में कोई रुचि नहीं दिखाई तो शिवपाल सिंह ने सपा छोड़कर अपनी अलग पार्टी बना ली. उनका कहना था कि सपा के नेतृत्व के अहंकारी रवैये से कई समाजवादी नेता उपेक्षित महसूस कर रहे थे. अब वे सभी शिवपाल के मोर्चे में शामिल हो जाएंगे. ख़ुद मुलायम सिंह यादव भी अखिलेश द्वारा समाजवादी पार्टी पर ‘क़ब्ज़ा’ किए जाने से नाराज़ हैं. वे अपने क़रीबियों के सामने कई बार अखिलेश के प्रति अपनी नाराज़गी जाहिर कर चुके हैं. संभव है कि वे शिवपाल के मोर्चे में शामिल हो जाएं. साथ ही शिवपाल का इरादा अखिलेश से नाराज़ सभी नेताओं को एक मंच पर लाना है. सपा में 1996 तक मुलायम सिंह के बाद शिवपाल दूसरे सबसे क़द्दावर नेता थे. यदि अखिलेश मुख्यमंत्री के पद पर बैठकर भी ख़ुद को कमज़ोर पाते थे तो उसकी बड़ी वजह शिवपाल का ताक़तवर होना था. अखिलेश सरकार में शिवपाल एक समानांतर सत्ता के केंद्र थे. लेकिन 2016 के अंत में अखिलेश यादव ने शिवपाल को न सिर्फ मंत्रिमंडल से हटा दिया बल्कि पार्टी से भी निष्कासित कर दिया था. साथ ही अमर सिंह को भी पार्टी से निष्कासित कर दिया गया. बाद में मुलायम सिंह के दख़ल से बीच का रास्ता निकाला गया लेकिन अखिलेश ने इस बीच मुलायम सिंह को पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष से हटाकर सपा के संगठन पर पूरी तरह क़ब्ज़ा कर लिया. तभी से अमर सिंह और शिवपाल, अखिलेश यादव से अलग राह तलाश कर रहे थे. इस पूरी प्रक्रिया में दो अहम बातें पीछे छूट गई हैं. पहली कि पिछले कुछ महीनों में शिवपाल यादव उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से कई बार मिले. दूसरी कि सपा से निष्कासित राज्यसभा सांसद अमर सिंह ने मंगलवार को लखनऊ में मीडिया से कहा कि उन्होंने शिवपाल की मुलाकात बीजेपी के वरिष्ठ नेताओं से रखी थी लेकिन शिवपाल उस बैठक में आए ही नहीं. यानी शिवपाल के फैसले के पीछे जिन लोगों का हाथ है उनमें अमर सिंह और योगी आदित्यनाथ प्रमुख हैं. अखिलेश के करीबी नेता खुलकर आरोप लगा रहे हैं कि शिवपाल तो बीजेपी के हाथ की कठपुतली बन गए हैं और अब उनके जीवन का एकमात्र ध्येय सपा-बसपा-कांग्रेस के तालमेल को तोड़ना है. यदि वे इसे तोड़ने में नाकाम रहते हैं तो इसे ज्यादा से ज्यादा नुकसान पहुंचा दें.

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