राहुल गाँधी की वजह से सपा और बसपा में अंतरकलह जारी

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कांग्रेस वर्किंग कमेटी की बैठक में यह तय हुआ है कि यदि 2019 में कांग्रेस सबसे बड़ी पार्टी बनती है तो राहुल गांधी को पीएम पद के एकमात्र दावेदार होंगे. इस बैठक में समान विचारधारा वाली पार्टियों को साथ लाने पर भी सहमति बनी. अध्यक्ष बनने के बाद कांग्रेस वर्किंग कमेटी की पहली बैठक से 2019 की रणभेरी भी फूंक दी गई, लेकिन कांग्रेस के इस फैसले से यूपी में गठबंधन को लेकर सियासत एक बार फिर गरमा सकती है.
दरअसल, यूपी में बसपा सुप्रीमो मायावती की अगुवाई में समाजवादी पार्टी और राष्ट्रीय लोकदल के साथ गठबंधन की रूपरेखा तैयार हो रही है. हाल ही में बसपा नेताओं ने मायावती को ही गठबंधन का पीएम चेहरा बनाने की हामी भी दी थी. हालांकि, बसपा प्रवक्ता सुधींद्र भदौरिया ने न्यूज18 से बातचीत में कहा कि राहुल गांधी को गठबंधन का पीएम चेहरा बनाए जाने का संज्ञान बहन मायावती लेंगी. इस पर जो भी फैसला लेना है वो मायावती ही लेंगी.
उधर कांग्रेस ने राहुल गांधी को गठबंधन का पीएम चेहरा घोषित कर 2019 लोकसभा चुनाव का शंखनाद तो कर दिया, लेकिन साथ ही सपा और बसपा को असमंजस में भी डाल दिया. सपा का कहना है कि अभी गठबंधन को लेकर राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव से बात नहीं हुई है. सपा प्रवक्ता सुनील सिंह ने कहा कि, “अभी तक सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष की तरफ से यह नहीं कहा गया है कि गठबंधन में कांग्रेस है या नहीं है और यह कांग्रेस वर्किंग कमेटी में तय हुआ है कि उनकी पार्टी का चेहरा राहुल गांधी होंगे. गठबंधन का चेहरा राहुल गांधी होंगे, ये भला कांग्रेस कैसे तय कर सकती है? कांग्रेस ने यह अकेले बैठकर तय किया है. गठबंधन के साथ नहीं.” दरअसल, पिछले दिनों लखनऊ के इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में हुए बसपा जोनल स्तरीय बैठक में राष्ट्रीय संयोजक समेत तमाम दिग्गज नेता मौजूद रहे. इस मौके पर मायावती को गठबंधन के प्रधानमंत्री चेहरे के तौर पर पेश किए जाने की हुंकार भी भरी गई थी. बसपा नेताओं का कहना था कि सभी क्षेत्रीय दलों ने मायावती को अपना नेता माना है. बसपा प्रदेश अध्यक्ष आरएस कुशवाहा ने कहा कि बहुजन समाज पार्टी सबको साथ लेकर चलने वाली पार्टी है. गरीब, पिछड़े और सर्व समाज को सिर्फ बसपा ने प्रतिनिधित्व दिया है. उन्होंने बीजेपी और कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि बाकी सभी पार्टियों ने सिर्फ उनका इस्तेमाल किया है. उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निशाना साधते हुए कहा कि भगवान राम के नाम पर धोखा देने वाले को इस बार सबक सिखाना है. केवल मायावती ही सर्वसमाज का कल्याण करेंगी, इसलिए हम सभी को जुटकर इस बार ऐसी जमीन तैयार करनी है कि दूसरी पार्टियां पनप ही न सकें.इतना ही नहीं समाजवादी पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव भी कह चुके हैं कि बसपा से गठबंधन के बाद उनकी केंद्र की राजनीति में कोई दिलचस्पी नहीं है. उनका कहना था कि मायावती केंद्र की राजनीति करेंगी और वे राज्य की राजनीति से संतुष्ट हैं. गठबंधन के पीएम चेहरे को लेकर अखिलेश यादव का कहना था कि चुनाव परिणाम आने के बाद ही पीएम पद के नेता का चुनाव किया जाएगा. चुनाव से पहले गठबंधन का कोई नेता पीएम पद का चेहरा नहीं होगा.

 

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