दिल्ली सरकार ने पेश किया ग्रीन बजट

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राष्ट्रीय राजधानी की खराब होती आबोहवा को ध्यान में रखते हुए पहली बार दिल्ली सरकार ने ग्रीन बजट पेश किया है। दिल्ली के उपमुख्यमंत्री मनीष सिसौदिया ने बृहस्पतिवार बजट पेश करते हुए कहा कि संभवत: यह देश के किसी भी सदन में पेश किया जाने वाला पहला ग्रीन बजट है। इसके तहत पर्यावरण, ऊर्जा, परिवहन और लोक निर्माण विभाग के 26 कार्यक्रमों और योजनाओं को एक धागे में पिरोकर एकीकृत अभियान शुरू करने की योजना है। जिससे दिल्ली को प्रदूषण रहित बनाया जा सके। पिछले तीन बार की तरह इस साल भी सरकार शिक्षा पर सबसे ज्यादा खर्च करेगी।
इसमें सरकार का जोर बच्चों की सुरक्षा पर होगा। सिसोदिया ने दावा किया कि केंद्र समेत दूसरे राज्यों की ट्रिक डाउन इकोनॉमिक्स के उलट उनकी सरकार ट्रिकल अप थ्योरी पर काम कर रही है। इसका सीधा मतलब है कि सरकार ने ऐसी नीतियां बनाई हैं, जिसका सीधा फायदा गरीब और मध्यम वर्ग को मिल सके। दिल्ली सरकार का उद्देश्य बड़े-बड़े औद्योगिक घरानों व विदेशी निवेशकों को कर छूट और सब्सिडी देने व इनवेस्टर समिट बुलाने की जगह आम लोगों का सीधे तौर पर फायदा पहुंचाने का है। इसी वजह से सरकार पिछले तीन सालों से पूरे बजट का एक चौथाई शिक्षा पर खर्च कर रही है। बजट का 11.3 फीसदी का सालाना खर्च स्वास्थ्य पर होगा। लगातार लोगों को सस्ती बिजली व मुफ्त में पानी मुहैया कराया जा रहा है। इसके अलावा न्यूनतम मजदूरी में 37 फीसदी की बढ़ोत्तरी की गई है। वहीं, आंगनबाड़ी, आशा वर्कर्स, अतिथि शिक्षकों को वेतन भी बढ़ाया गया। मनीष सिसोदिया ने कहा कि तीन साल पहले दिल्ली सरकार का बजट 309000 करोड़ रुपये था। जबकि आगामी वित्त वर्ष के लिये इसे 53,000 करोड़ रुपये करने का प्रस्ताव है।

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