2019 लोकसभा चुनाव में उपेंद्र कुशवाहा की पार्टी को अपेच्छित सीट नहीं मिलने के आसार

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नई दिल्ली
बिहार में आम चुनाव से पहले नरेंद्र मोदी की अगुवाई वाली एनडीए को बड़ी राहत मिली है। एनडीए में सीटों को लेकर समझौता हो गया है। समझौते के अनुसार, बीजेपी और जेडीयू बराबर सीटों पर चुनाव लड़ेंगी। शुक्रवार को बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने संयुक्त रूप से इसकी घोषणा की। सूत्रों की मानें तो दोनों पार्टियां 17-17 सीटों पर चुनाव लड़ेंगी, जबकि एलजेपी 4 और आरएलएसपी 2 सीटों पर चुनाव लड़ेंगी। हालांकि अभी तक अधिकारिक तौर पर इसका ऐलान नहीं हुआ है। शाह ने बताया कि दो-तीन दिनों में इस बात का ऐलान हो जाएगा कि कौन किनती सीटों पर कहां से लड़ेगा।
आम चुनाव से पहले बिहार पहला राज्य जहां किसी गंठबंधन ने अपनी सीटों का समझौता करने का ऐलान किया है। एनडीए की अन्य सहयोगी एलजेपी और आरएलएसपी के नेता चिराग पासवान और उपेंद्र कुशवाहा ने एनबीटी से कहा बातचीत में कहा कि उनसे सीटों को लेकर बात हुई है, सबकुछ सम्मानजनक तरीके से तय होगा। सूत्रों के अनुसार, तय हुआ है कि जेडीयू और बीजेपी राज्य में 17-17 सीटों पर लड़ेंगी। रामविलास पासवान की पार्टी 4 और उपेंद्र कुशवाहा की पार्टी 2 सीटों पर चुनाव लड़ेंगी। सूत्रों के अनुसार 40 सीटों का बंटवारा भी नए सिरे से होगा और इसमें इन दलों के बीच कई सीटों की अदला-बदली भी हो सकती है।
अब बीजेपी के सामने सबसे बड़ी चिंता और चुनौती उन नेताओं को मनाने की होगी, जिनकी सीटें सहयोगी दलों को दी जाएंगी। अगर बीजेपी 17 सीटों पर लड़ती है तो 5 मौजूदा सांसद का टिकट कटेगा और 12 सीटों पर दावेदारी हटेगी। ऐसे में बीजेपी को अपने मौजूदा सांसद और नेताओं की नाराजगी का सामना करना पड़ सकता है। इसके अलावा रामविलास पासवना की पार्टी को भी 2 मौजूदा सीट छोड़नी पड़ सकती है। खबर है कि उपेंद्र कुशवाहा की पार्टी को भी एक सीट छोड़नी पड़ सकती है। जेडीयू से जुड़े सूत्रों के अनुसार, अगर उपेंद्र कुशवाहा एनडीए गठबंधन से अलग हुए तो उनकी सीट जेडीयू और बीजेपी के बीच बराबर बंट जाएगी।

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