देश में घटिया दवा बनाने वाली कंपनियों की खैर नहीं

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देश का ड्रग रेग्युलेटर कई कंपनियों के कारखानों की दोबारा जांच करने की तैयारी में है। इस जांच में देखा जाएगा कि देश में बेची जाने वाली और विदेश में निर्यात की जाने वाली दवाओं की गुणवत्ता सुधारने के लिए कंपनियों ने उचित कदम उठाए हैं या नहीं। इस जांच के लिए केंद्र और राज्य स्तर के ड्रग रेग्युलेटर मिलकर काम करेंगे। उम्मीद है कि यह जांच अगले तीन हफ्तों में शुरू हो जाएगी। तय गुड मैन्युफैक्चरिंग प्रैक्टिस (जीएमपी) का पालन न करने वाली कंपनियों को दंड भी दिया जा सकता है। अभी कई बड़ी भारतीय दवा कंपनियां यूएस एफडीए और हेल्थ कनाडा जैसी ग्लोबल रेग्युलेटरी एजेंसियों की ओर से तय कंप्लायंस प्रसीजर्स को लेकर मुश्किलों का सामना कर रही हैं। स्वास्थ्य मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि सेंट्रल और स्टेट ड्रग रेग्युलेटर्स की जॉइंट टीम उन 147 दवा कारखानों की दोबारा जांच करेगी, जिनका निरीक्षण पिछले दो वर्षों में किया गया है। अधिकारी ने बताया कि इनके अलावा राज्यों के ड्रग रेग्युलेटर 37 कारखानों की भी दोबारा जांच करेंगे क्योंकि संयुक्त जांच के पहले चरण में इन्हें कुछ मानकों पर खरा नहीं पाया गया था। इन अतिरिक्त कारखानों में अधिकतर कारखाने बड़ी दवा कंपनियों के हैं।
अधिकारी ने कहा कि दूसरी बार की जांच में अगर इन कारखानों में नियमों का उल्लंघन पाया गया तो स्टेट ड्रग रेग्युलेटर्स इनके लाइसेंस सस्पेंड करने या कैंसल करने की कार्रवाई कर सकते हैं। इस लिहाज से मामला पहले चरण की जांच से अलग है। पहली जांच में नियमों के उल्लंघन की बात पता चलने पर कंपनियों को खामियां दूर करने का वक्त दिया गया था।अधिकारी ने उन कंपनियों के नाम बताने से मना कर दिया, जिनके कारखानों की दोबारा जांच होनी है। अधिकारी के मुताबिक, दूसरी संयुक्त जांच के दायरे में छोटी और मझोली कंपनियों के कारखाने हैं। इस मामले में इंडियन ड्रग मैन्युफैक्चरर्स असोसिएशन के प्रेजिडेंट दीपनाथ रॉय चौधरी ने कहा, ‘इरादा तो ठीक है, लेकिन सरकार अगर चाहती है कि इंडस्ट्री इन स्टैंडर्ड्स के मुताबिक चले तो उसे कंपनियों को फाइनैंशल और टेक्निकल सपॉर्ट देना चाहिए।’ उन्होंने कहा कि छोटी और मझोली दवा कंपनियों को फिजिकल इंफ्रास्ट्रक्चर पर न केवल बड़ी रकम निवेश करनी होगी, बल्कि डब्ल्यूएचओ जीएमपी गाइडलाइंस के पालन के लिए ऑपरेशनल कॉस्ट पर भी ज्यादा खर्च करना होगा। इंडियन फार्मास्युटिकल अलायंस के सेक्रटरी जनरल डी.जी. शाह ने कहा, ‘मरीजों का हित इसी में है कि भारतीय जीएमपी शर्तों का पालन न करने वाली यूनिट्स को उचित चेतावनी के बाद बंद कर दिया जाए।’ इस बारे में इंडस्ट्री के एक एग्जिक्युटिव ने कहा, ‘अगर मानकों को सख्त कर दिया गया तो कई छोटी कंपनियों को कारोबार समेटना पड़ जाएगा।’

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